• Shubhshree mathur

रेज़गारी

समय, प्रेम

और अभिलाषा


जेब में पड़े हैं कहीं

जब खर्च करना होगा

तब मिलेंगे नहीं


अभी मिली है

तो रख कर

भूल गये

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